Sainik@Bharat
जय भारत , जय जवान, अजय धर्म हमारा, जय भारत धरा पर जब बजी अनुनाद, सैनिकों ने ज़ाहिर किया साहस, संप्रभु भारत माँ की औलाद ने दी हर दिशा में दुश्मन की तबाही। दिल के फफूले जल उठे रक्षक, हिफ़ाज़त करते रहें हर दुश्मन से। मानवता धर्म से निकले अमन के चराग़-तले वतन के जाँ-निसार को। सर्दियों की रातें जब होती काली, तुमने नींद को त्यागा, प्यारे देश के लिए, जंगलों में, पहाड़ों की ऊँचाई में, हर कदम पर लिखा विजय का विधान। दिल के फफूले जल उठे रक्षक, हिफ़ाज़त करते रहें हर दुश्मन से। मानवता धर्म से निकले अमन के चराग़-तले वतन के जाँ-निसार को। भाईचारे को बढ़ावा देखकर, कर चले वे फिदा जान-ओ-तन। सलाम करते हैं हमारी एकता की गुणक वीरों की जिंदगानी को। दिल के फफूले जल उठे रक्षक, हिफ़ाज़त करते रहें हर दुश्मन से। मानवता धर्म से निकले अमन के चराग़-तले वतन के जाँ-निसार को। संप्रभु समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य के लिए, तिरंगा थामे सैनिक, अटल आस्था के साथ। जय भारत , जय जवान, अजय धर्म हमारा, जय भारत Concept, Tune & Script- Bruno Albert संकल्प & गीत - ब्रूनो अल्बर्ट
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