बचपन में पैसा जरूर कम था,
पर यकीन मानो उस बचपन में दम था.
ये दौलत भी ले लो,
ये शोहरत भी ले लो
भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी
मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन
वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी.
ख़ुदा अबकी बार जो मेरी कहानी लिखना,
बचपन में ही मर जाऊ ऐसी जिंदगानी लिखना.