साहिब बंदगी पुरानी दोस्ती को इस नई ताकत से मत बोलो यह संबंधों की तुरपाई है षड्यंत्र से मत खोलो मेरे लहजे की छेनी से गले कुछ देवता जो कल मेरे शब्दों पर मरते थ...
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