गाँव पर कविता
“ गाँव “
अब ताले खुलेंगे !
परदेसी लौट आये हैं !
शायद गहरी कोई चोट खाये हैं !
अब ताले खुलेंगे ।
अब जाले हटेंगे !
मालिक लौट आये हैं !
शायद नौकर उनके, नौकरी छोड़ आये हैं !
अब ताले खुलेंगे ।
अब बुजुर्ग मुस्कराएँगे !
नाती-पोते सब लौट आये हैं !
शायद खिलोनें सारे टूट चुके हैं !
अब ताले खुलेंगे ।
अब गाँव गायेंगे !
गाँव वाले लौट आये हैं !
शायद शहर पराये हो आये हैं !
अब ताले खुलेंगे ।